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For India आज मैं आपके लिए एक कविता पढ़ना चाहूँगी इस कविता के लेखक है Vijay Mallya आज हमारी हवा हमसे रूठ गयी है रोटी हवा को मना लेते है लाड प्यार से घर वापस बुला लेते हैं आज हम तड़प रहे हैं कि कब समुंदर की लहरों से खेले पहाड़ों पर जाकर चीखे चिल्लाए वहाँ रास्तों पर तफरी करें गाड़ी की चाबी घुमाकर हवा से बातें करें यार दोस्तों से जब भी शक्ति है रिश्तेदारों में मटरगश्ती करें पर रोटी हवा को मना लेते लाड़ प्यार से घर वापस बुला लेते हैं किसी की doctor माँ आज भी घर से बाहर अस्पताल में है किसी का police भाई आज भी सड़क पर तैनात है किसी की बूढी नानी ने खेत में आज भी सब्जियाँ उगाई है दीदी आज भी झुग्गी झोपड़ियों में अनाज पहुँचा रही है हमारी रूठी हवा को मना रही है हमें भी घर बैठने की छोटी सी जिम्मेदारी दी गयी है तो रुकते हैं हमारी एक गलती एक जान माँग रही है हमारी एक गलती से एक जान जा रही है रुकते है समंदर वही है पहाड़ वही है उगता डूबता सूरज चाँद की रौशनी टिमटिमाती तारे तफरी के रात दोस्ती के अड्डे सब वही हैं और यही कह रहे हैं कि रुक तो रुकते है पहले रोटी हवा को मना लेते है लाभ प्यार से घर वापस बुला लेते हैं तो रुकते it's time to say I can I will and I must press the donate button below on the Facebook page and do your bit for India I for India